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4 cricketers fight with boards career ruined: क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है, जहां एक गेंद आपकी किस्मत बदल सकती है. लेकिन कभी-कभी किस्मत बदलने के लिए मैदान पर खराब प्रदर्शन की जरूरत नहीं होती, बल्कि क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों से एक अदद ‘पंगा’ ही काफी होता है. इतिहास गवाह है कि क्रिकेटरों का अपने बोर्ड के साथ मनमुटाव कोई नई बात नहीं है. अक्सर खिलाड़ी संन्यास के बाद अपनी भड़ास निकालते हैं, लेकिन कुछ बदकिस्मत ऐसे भी रहे जिन्होंने अपने करियर की ऊंचाई पर रहते हुए सिस्टम से भिड़ गए. नतीजा? किसी का करियर असमय खत्म हो गया, तो किसी को बेंच पर बैठकर दिन काटने पड़े.

भारतीय क्रिकेट के सबसे टैलेंटेड बल्लेबाजों में शुमार अंबाती रायडू (Ambati rayudu) का करियर एक ट्वीट की भेंट चढ़ गया. साल 2019 के वनडे वर्ल्ड कप से ठीक पहले रायडू को टीम इंडिया का नंबर-4 बल्लेबाज माना जा रहा था. उन्होंने भारत के लिए 55 वनडे मैचों में 47.05 की शानदार औसत से 1694 रन बनाए थे, जिसमें 3 शतक और 10 अर्धशतक शामिल थे. लेकिन जब वर्ल्ड कप टीम चुनी गई, तो रायडू का पत्ता साफ कर दिया गया.

उस वक्त के मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने रायडू की जगह ऑलराउंडर विजय शंकर को टीम में शामिल किया और उन्हें ‘थ्री-डी’ (थ्री-डायमेंशनल) खिलाड़ी बताया जो बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग तीनों कर सके. आहत अंबाती रायडू ने इस पर तंज कसते हुए ट्वीट किया ‘वर्ल्ड कप मैच देखने के लिए अभी-अभी थ्री-डी चश्मे का ऑर्डर दिया है.’

हालांकि, बीसीसीआई ने रायडू के इस ट्वीट पर कोई आधिकारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की, लेकिन उन्हें ‘ब्लैकलिस्ट’ कर दिया गया. वर्ल्ड कप के दौरान जब शिखर धवन और विजय शंकर चोटिल हुए, तब भी स्टैंडबाय पर होने के बावजूद रायडू को नहीं बुलाया गया. इस उपेक्षा से तंग आकर 2019 में ही महज 33 साल की उम्र में रायडू ने इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया.
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पाकिस्तान के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर (Mohammad Amir) का करियर किसी रोलरकोस्टर राइड से कम नहीं रहा. 2009 में महज 17 साल की उम्र में डेब्यू करने वाले आमिर ने अपनी स्विंग से दुनिया को दीवाना बना दिया था. उन्होंने पाकिस्तान के लिए 36 टेस्ट में 119 विकेट, 61 वनडे में 81 विकेट और 50 टी20 में 59 विकेट चटकाए. लेकिन 2020 में, सिर्फ 28 साल की उम्र में उन्होंने अचानक इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेकर सबको चौंका दिया.

आमिर ने संन्यास लेते वक्त पीसीबी (पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड) और तत्कालीन कोचिंग स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने सीधे तौर पर मुख्य कोच मिसबाह-उल-हक और गेंदबाजी कोच वकार यूनिस का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है. आमिर का आरोप था कि मैनेजमेंट खिलाड़ियों को उनके खिलाफ भड़का रहा था और उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहा था. नतीजा यह हुआ कि एक बेहद प्रतिभाशाली गेंदबाज का करियर समय से पहले थम गया.

इंग्लैंड के महानतम बल्लेबाजों में से एक केविन पीटरसन (Kevin Pietersen) और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा. पीटरसन ने इंग्लैंड के लिए 104 टेस्ट में 8181 रन (औसत 47.28) और 136 वनडे में 4440 रन बनाए थे. साल 2012 में पीटरसन का ईसीबी (इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड) से तब झगड़ा शुरू हुआ, जब बोर्ड उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में खेलने की पूरी अनुमति नहीं दे रहा था.

नाराज केविन पीटरसन ने 2012 में वनडे से संन्यास ले लिया। हालांकि, बाद में समझौता हुआ और उन्होंने फैसला बदला, लेकिन रिश्ते कभी सामान्य नहीं हो सके. उन्होंने 2013 में अपना आखिरी वनडे और 2014 में आखिरी टेस्ट खेला. पीटरसन ने बाद में खुलासा किया कि व्यस्त कार्यक्रम के कारण उन्होंने वनडे छोड़ा था, लेकिन सजा के तौर पर ईसीबी ने उन्हें टी20 इंटरनेशनल खेलने से भी बैन कर दिया। बोर्ड से पंगा लेने के बाद उन्हें दोबारा कभी टीम में नहीं चुना गया.

वेस्टइंडीज के महान ऑलराउंडर ड्वेन ब्रावो (295 इंटरनेशनल मैच, 6310 रन और 363 विकेट) का झगड़ा तो इतिहास के सबसे बड़े विवादों में गिना जाता है. साल 2014 में ब्रावो वेस्टइंडीज टीम के कप्तान थे। उस समय खिलाड़ियों के भुगतान (पे-डिस्प्यूट) को लेकर वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड (WICB) और खिलाड़ियों के बीच ठन गई थी. ब्रावो ने बोर्ड को कई पत्र लिखे, लेकिन बोर्ड का अड़ियल रवैया बरकरार रहा.

विवाद इतना बढ़ा कि ब्रावो (Dwayne Bravo) की कप्तानी में वेस्टइंडीज की टीम 2014 में भारत का दौरा बीच में ही छोड़कर वापस लौट गई. इस बगावत की गाज ब्रावो पर गिरनी तय थी. बोर्ड ने उन्हें कप्तानी से हटा दिया और वनडे टीम से बाहर कर दिया. इसके बाद ब्रावो ने वनडे से संन्यास ले लिया। हालांकि वह टी20 खेलते रहे, लेकिन बोर्ड से तल्खी इतनी बढ़ चुकी थी कि उन्होंने फ्रेंचाइजी क्रिकेट (IPL, CPL) को इंटरनेशनल क्रिकेट पर तरजीह देना शुरू कर दिया.

इन चारों क्रिकेटरों के आंकड़े बताते हैं कि वे अपने-अपने देश के मैच विनर थे. अंबाती रायडू का वनडे औसत (47 से ज्यादा) कई दिग्गजों से बेहतर था, आमिर की उम्र और धार दोनों उनके साथ थीं, पीटरसन दुनिया के सबसे विस्फोटक बल्लेबाज थे और ब्रावो डेथ ओवर्स के राजा थे. लेकिन क्रिकेट इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी खिलाड़ी ने बोर्ड के सिस्टम, चयनकर्ताओं या कोचिंग स्टाफ के अहंकार को चुनौती दी, तब-तब नुकसान खेल और खिलाड़ी का ही हुआ. इन खिलाड़ियों का करियर इस बात का उदाहरण है कि क्रिकेट की दुनिया में प्रतिभा चाहे जितनी बड़ी हो, ‘सिस्टम’ से टकराने की कीमत हमेशा चुकाना ही पड़ती है.